Thursday, October 22, 2009

एक नजर में Etawah

एक नजर में Etawah
भौगोलिक क्षेत्रफल - २४३४ वर्ग किलोमीटर२३५१२५ वर्ग हैक्टेयरकृषि योग्य भूमि - १४७५३१ हैक्टेयरदो फसली भूमि - ८८८६८ हैक्टेयरगेहूं की फसल का क्षेत्रफल -८७८१६ हैक्टेयरधान की फसल का क्षेत्रफल - ४४४९१ हैक्टेयरजनसँख्या कुल - ११.३० लाख , पुरूष-६.१६ लाख , स्त्री -५.१४ लाखग्रामीण- ८.९५ लाख , शहरी - २.३५ लाख , अनु.जा.-२.६३ लाखसाक्षर कुल - ४.८१ लाख , पुरूष-३.२७ लाख , स्त्री -१.५३ लाखतहसील - ५ (इटावा, भरथना, सैफई, जसवंतनगर, चकरनगर)विकासखंड- ८ - ( महेवा, ताखा, बढ़पुरा, बसरेहर, भरथना, सैफई, जसवंतनगर, चकरनगर )नगर पालिका - ३ (इटावा, भरथना, जसवंतनगर)टाऊन एरिया - ३ ( इकदिल, बकेवर,लखना)पुलिस स्टेशन - १९ (शहरी-६ ग्रामीण-१३)न्याय पंचायत - ७५ग्राम पंचायत - ४२०ग्राम- ६९४रेलवे स्टेशन - ७ ( बलरई, जसवंतनगर, सराय भूपत ,इटावा , इकदिल , भरथना , साम्हों ) रेल लाइन की लम्बाई - ५६ किलो मीटरडाकघर-१२३पक्की सड़क- १५३० किलोमीटरनदियाँ - १० (यमुना, चम्बल, क्वारी, सेंगर, सिरसा,पहुज,अहनैया, पुरहा, पांडो, अरिंद )

Tuesday, October 20, 2009

मोक्ष-मार्ग

इष्टापथ से तात्पर्य है - अभीष्ट प्राप्ति का रास्ता ।
इष्ट यानि मन की इच्छा, अर्थात कामना।
कामना होती है अंतहीन। इष्ट दर इष्ट (इश्टेष्ट ) एक कामना पूरी होती ही नई कामना जन्म लेती है जिसे कहते हैं तृष्णा। तृष्णा में सुख की अनुभूति कहाँ? दुःख ही दुःख।
मानव जीवन का इष्ट है - जीवात्मा का परमात्मा से मिलन अर्थात मोक्ष।
मोक्ष मार्ग ही इष्टापथ है।
यह इष्टापथ कहाँ है? पुराकाल में जो भूगोल परिकल्पित किया गया था, उसमे कैलाश से बदरिका होते हुए अरुणाचल तक हिमाच्छादित भू-भाग उत्तरापथ और अवंतिका के दक्षिण का आरान्यिक भू-भाग दक्षिणापथ कहा गया। उत्तरापथ और दक्षिणापथ के मध्य गंगा-यमुना के दोआबी क्षेत्र का दक्षिणी भाग इष्टापथ माना गया, जिसके अर्न्तगत आते है इन्द्रप्रस्थ; शूकर- क्षेत्र, मधुवन (ब्रज), पंचाल, कन्नोज और पंचनद संगम। इष्टापथ ऋषि मुनियों की तपस्थली रही, ऋषि अनवरत करते यजन। यजन-कुंड के लिए वेदोक्त इष्टिकाओं का निर्माण मधुवन व पंचनद के मध्य यमुना के तटीय भू-भाग में होता था उसे नाम दिया गया- इष्टिकापुरी। कालांतर में इष्टापथ भी इष्टिकापुरी तक सिमिट गया।

Thursday, October 15, 2009

जयत्विष्टिकापुरी

जयतु जयतु अस्माकं धरणी, जयत्विष्टिकापुर्याः धरणी।

गंगा-यमुना नद्योर्मध्ये, श्रेष्ठा चेयमुर्वरा धरणी।
जयतु जयतु अस्माकं धरणी, जयत्विष्टिकापुर्याः धरणी।।

घारं पारं करक पचारम, इति नामसु विभक्ता धरणी।
जयतु जयतु अस्माकं धरणी, जयत्विष्टिकापुर्याः धरणी। ।

गंग-देव-शिशु-पंगु कवीनाम काव्यै सतत गुन्जिता धरणी।
जयतु जयतु अस्माकं धरणी, जयत्विष्टिकापुर्याः धरणी। ।

राज्ये- राष्ट्रे - विश्व गोलके संशोभितालंकरिता धरणी।
जयतु जयतु अस्माकं धरणी, जयत्विष्टिकापुर्याः धरणी। ।

-देवेशाचार्य