इष्टापथ से तात्पर्य है - अभीष्ट प्राप्ति का रास्ता ।
इष्ट यानि मन की इच्छा, अर्थात कामना।
कामना होती है अंतहीन। इष्ट दर इष्ट (इश्टेष्ट ) एक कामना पूरी होती ही नई कामना जन्म लेती है जिसे कहते हैं तृष्णा। तृष्णा में सुख की अनुभूति कहाँ? दुःख ही दुःख।
मानव जीवन का इष्ट है - जीवात्मा का परमात्मा से मिलन अर्थात मोक्ष।
मोक्ष मार्ग ही इष्टापथ है।
यह इष्टापथ कहाँ है? पुराकाल में जो भूगोल परिकल्पित किया गया था, उसमे कैलाश से बदरिका होते हुए अरुणाचल तक हिमाच्छादित भू-भाग उत्तरापथ और अवंतिका के दक्षिण का आरान्यिक भू-भाग दक्षिणापथ कहा गया। उत्तरापथ और दक्षिणापथ के मध्य गंगा-यमुना के दोआबी क्षेत्र का दक्षिणी भाग इष्टापथ माना गया, जिसके अर्न्तगत आते है इन्द्रप्रस्थ; शूकर- क्षेत्र, मधुवन (ब्रज), पंचाल, कन्नोज और पंचनद संगम। इष्टापथ ऋषि मुनियों की तपस्थली रही, ऋषि अनवरत करते यजन। यजन-कुंड के लिए वेदोक्त इष्टिकाओं का निर्माण मधुवन व पंचनद के मध्य यमुना के तटीय भू-भाग में होता था उसे नाम दिया गया- इष्टिकापुरी। कालांतर में इष्टापथ भी इष्टिकापुरी तक सिमिट गया।
Tuesday, October 20, 2009
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment