Wednesday, November 25, 2009

इटावा महोत्सव का शताब्दी वर्ष

भारतवर्ष में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाली जनपद प्रदर्शनी (इटावा महोत्सव) के १०० वर्ष पूरे हो रहे है, २५ नबंवर २००९ को मंडलायुक्त कानपुर श्री वेंकटेश्वर लू ने भव्य समारोह में इटावा महोत्सव के शताव्दी वर्ष का शुभारम्भ किया। यह आयोजन १० जनवरी २०१० तक चलेगा ।

Friday, November 6, 2009

जनसंख्या

१९९१ की जनगणना में जिले की आबादी के लिए ४ ,२४२ ,३१० (औरैया सहित )

वर्ग किलोमीटर ९४६ व्यक्तियों के घनत्व के साथ।

लिंग अनुपात ८१६ स्त्रियाँ -१००० पुरुष ग्रामीण क्षेत्र में

८७० स्त्रियाँ -१००० पुरुष शहरी क्षेत्र में है।

Thursday, November 5, 2009

स्थलाकृति

इटावा गंगा के मैदान में है, जिले को चार प्राकृतिक भागों में विभाजित है।

पचार

जिले का उत्तरी भाग, जो सेंगर नदी द्वारा विभाजित है पचार के रूप में जाना जाता है। यह ऊपरी भूमि , जिनमें से सतह पर ही पांडु और अरिंद या पपड़ी के रूप में कभी कभी सैन्दी लकीरें या एक या दो विचारशून्य नदियों द्वारा टूट गया है। यहाँ की मिट्टी का सबसे बड़ा हिस्सा सहायक नदियों अहिनैया और पुरहा से अधिक उपजाऊ कृषि भूमि है यह क्षेत्र जिले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है और अच्छी तरह से घानी आबादी की बस्तियों से युक्त है।

घार

सेंगर और यमुना के बीच का क्षेत्र घार के रूप में जाना जाता है। यह धरती पचार के मुकाबले कम उपजाऊ है। यहाँ और वहाँ ज़मीन रेत और भुर से युक्त है , नहर विस्तार से इस क्षेत्र की विशेषताओं को बदल दिया है ।

करका

घार के दक्षिण ऊपरी और यमुना के किनारे का क्षेत्र करका के रूप में जाना जाता है। जिले का तीसरा प्राकृतिक विभाजन साथ बीहड़ों का इलाका है ।

पार

यमुना और चंबल के बीच भूमि पार कहलाती है और यह क्षेत्र कुँवारी तक है यह पार पट्टी कामेत , चकरनगर , सहसों , भरेह और सन्दौस में विभाजित किया गया है

भूगोल

इटावा जिला उत्तर २६ ° ४७ 'उत्तरी अक्षांश और ७२ °२० "पूर्वी देशांतर उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में है और कानपुर मंडल का एक हिस्सा है। आकार में यह उत्तर से दक्षिण की ओर ७० किलोमीटर की लंबाई के साथ एक परल्लेलोग्राम है। और पूर्व पश्चिम ६६ किलोमीटर है। एक तरफ २४ किलोमीटर पर दूसरी तरफ। इटावा के उत्तर में फर्रुखाबाद और मैनपुरी जिले, जबकि पश्चिमी सीमा अद्जोइंस के छोटे हद तक आगरा जिले के तहसील बाह. पूर्वी के औरैया जिले के साथ सीमा क्षेत्र दक्षिण पूर्व में जालौन और दक्षिण में ग्वालियर मंडल का भिंड जिला है। १९९९ में जिले का क्षेत्रफल २४३४ वर्ग किलोमीटर है। जिले का अधिक से अधिक भाग दोआब या गंगा और जमुना के बीच जलोढ़ मैदान के भीतर है. इस भाग दो वर्गों, नदी सेंगर की गहरी घाटी से विभाजित करने में स्वाभाविक रूप से हो जाता है। उत्तर पथ-के पूर्व का भू-भाग उपजाऊ है, जमुना pattii से परे मध्य प्रदेश की सीमा में चंबल और कुआरी नदी के साथ उलझ घाटियों फैली हुई है. इस दूरस्थ पथ चट्टानी ग्लेन्स और पहाड़ torrents , देशी गढ़ों के अवशेषों की एक श्रृंखला है।

अपना इटावा

इटावा भारत में यमुना नदी के तट पर उत्तर प्रदेश के राज्य में स्थित है. इटावा जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है. शहर के १८५७ के विद्रोह में एलन ओक्टावियन ह्यूम,( भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक) के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र था श्री ह्यूम जिला कलेक्टर थे । इसके अलावा, संगम या यमुना और चंबल के बीच संगम का स्थान है. यह भी भारत के महान हेगड़े के अवशेष की साइट है. 2001 की जनगणना में इटावा के जनसंख्या २११,४६० थी।

Thursday, October 22, 2009

एक नजर में Etawah

एक नजर में Etawah
भौगोलिक क्षेत्रफल - २४३४ वर्ग किलोमीटर२३५१२५ वर्ग हैक्टेयरकृषि योग्य भूमि - १४७५३१ हैक्टेयरदो फसली भूमि - ८८८६८ हैक्टेयरगेहूं की फसल का क्षेत्रफल -८७८१६ हैक्टेयरधान की फसल का क्षेत्रफल - ४४४९१ हैक्टेयरजनसँख्या कुल - ११.३० लाख , पुरूष-६.१६ लाख , स्त्री -५.१४ लाखग्रामीण- ८.९५ लाख , शहरी - २.३५ लाख , अनु.जा.-२.६३ लाखसाक्षर कुल - ४.८१ लाख , पुरूष-३.२७ लाख , स्त्री -१.५३ लाखतहसील - ५ (इटावा, भरथना, सैफई, जसवंतनगर, चकरनगर)विकासखंड- ८ - ( महेवा, ताखा, बढ़पुरा, बसरेहर, भरथना, सैफई, जसवंतनगर, चकरनगर )नगर पालिका - ३ (इटावा, भरथना, जसवंतनगर)टाऊन एरिया - ३ ( इकदिल, बकेवर,लखना)पुलिस स्टेशन - १९ (शहरी-६ ग्रामीण-१३)न्याय पंचायत - ७५ग्राम पंचायत - ४२०ग्राम- ६९४रेलवे स्टेशन - ७ ( बलरई, जसवंतनगर, सराय भूपत ,इटावा , इकदिल , भरथना , साम्हों ) रेल लाइन की लम्बाई - ५६ किलो मीटरडाकघर-१२३पक्की सड़क- १५३० किलोमीटरनदियाँ - १० (यमुना, चम्बल, क्वारी, सेंगर, सिरसा,पहुज,अहनैया, पुरहा, पांडो, अरिंद )

Tuesday, October 20, 2009

मोक्ष-मार्ग

इष्टापथ से तात्पर्य है - अभीष्ट प्राप्ति का रास्ता ।
इष्ट यानि मन की इच्छा, अर्थात कामना।
कामना होती है अंतहीन। इष्ट दर इष्ट (इश्टेष्ट ) एक कामना पूरी होती ही नई कामना जन्म लेती है जिसे कहते हैं तृष्णा। तृष्णा में सुख की अनुभूति कहाँ? दुःख ही दुःख।
मानव जीवन का इष्ट है - जीवात्मा का परमात्मा से मिलन अर्थात मोक्ष।
मोक्ष मार्ग ही इष्टापथ है।
यह इष्टापथ कहाँ है? पुराकाल में जो भूगोल परिकल्पित किया गया था, उसमे कैलाश से बदरिका होते हुए अरुणाचल तक हिमाच्छादित भू-भाग उत्तरापथ और अवंतिका के दक्षिण का आरान्यिक भू-भाग दक्षिणापथ कहा गया। उत्तरापथ और दक्षिणापथ के मध्य गंगा-यमुना के दोआबी क्षेत्र का दक्षिणी भाग इष्टापथ माना गया, जिसके अर्न्तगत आते है इन्द्रप्रस्थ; शूकर- क्षेत्र, मधुवन (ब्रज), पंचाल, कन्नोज और पंचनद संगम। इष्टापथ ऋषि मुनियों की तपस्थली रही, ऋषि अनवरत करते यजन। यजन-कुंड के लिए वेदोक्त इष्टिकाओं का निर्माण मधुवन व पंचनद के मध्य यमुना के तटीय भू-भाग में होता था उसे नाम दिया गया- इष्टिकापुरी। कालांतर में इष्टापथ भी इष्टिकापुरी तक सिमिट गया।

Thursday, October 15, 2009

जयत्विष्टिकापुरी

जयतु जयतु अस्माकं धरणी, जयत्विष्टिकापुर्याः धरणी।

गंगा-यमुना नद्योर्मध्ये, श्रेष्ठा चेयमुर्वरा धरणी।
जयतु जयतु अस्माकं धरणी, जयत्विष्टिकापुर्याः धरणी।।

घारं पारं करक पचारम, इति नामसु विभक्ता धरणी।
जयतु जयतु अस्माकं धरणी, जयत्विष्टिकापुर्याः धरणी। ।

गंग-देव-शिशु-पंगु कवीनाम काव्यै सतत गुन्जिता धरणी।
जयतु जयतु अस्माकं धरणी, जयत्विष्टिकापुर्याः धरणी। ।

राज्ये- राष्ट्रे - विश्व गोलके संशोभितालंकरिता धरणी।
जयतु जयतु अस्माकं धरणी, जयत्विष्टिकापुर्याः धरणी। ।

-देवेशाचार्य

Saturday, September 26, 2009

पौराणिक तथ्य

इष्ट यानि कामना की सिद्धि का रास्ता है इष्टापथ।
मानव जीवन का इष्ट है मोक्ष। मोक्ष मार्ग ही इष्टापथ है। इष्ट साधना का माध्यम है इष्टि।
इष्टि का तात्पर्य है यजन, जहाँ स्रष्टि के प्रारंभ से ही निरंतर होते रहे यजन।
चतुर्दिक वाहिनी कालिंदी का तट यज्ञाग्नि में -
स्वाहा सुगन्धित व पर्यावरणीय गंधवायु से सारा परिवेश प्रफ्फुलित रहता था।
इष्टापथ ही बाद में हुआ इष्टिकापुरी।
इष्टिका का अर्थ है ईंट। संसार में इष्टिका (ईंट) का सर्वप्रथम प्रयोग यज्ञों में हुआ।
इसीलिए गंगा-यमुना के दोआव स्थित ऋषि भूमि (इष्टापथ) के जिस भाग में,
यज्योपयोगी त्रिकोणीय, चतुषकोणीय, पन्चकोनीय, सप्तकोनीय, नवग्रहीय ,नक्षत्रिय आदि आकृतियो की-
इष्टिका प्रयोग के वैदिक विधान का जहाँ पालन करते हुए इष्टिकाओं का निर्माण व पकाने की प्रक्रिया अपनाई गई
वह भू-भाग इष्टिकापुरी कहलाया।
आज इसे इटावा कहा जाता है ईंट + अवा ( भट्टा) का संयुक्त शब्द बना इटावा।
गंगा-यमुना के इस दोआब की श्रेष्ठ मिटटी का यह गुण सर्वविदित है - यहाँ ४-४ फसले होती हैं साथ ही इटावा में आज भी अन्य क्षेत्रों के मुकाबले काफी अधिक ईंट-भट्टे हैं और यहाँ की अब्बल दर्जे की ईंट विश्व भर में अति श्रेष्ठ है।

इष्टापथ


Saturday, July 11, 2009

इष्टिकापुरी अकादमी

योग योगेश्वर कृष्ण की लीला स्थली ब्रजमंडल के पूर्वी छोर पर बसा जनपद इटावा । यह भूभाग इष्टापथ के रूप में जाना जाता है। महाभारत के अनुसार- पुनः इष्टापथं ययौ। यानी कि पांडव वनवास और अज्ञातवास के दौरान बार-बार इष्टापथ गए। बटेश्वर से पंचनद संगम स्थित भारेश्वर तक के दुर्गम भू-भाग में अनगिनत शिवलिंग हैं इनमें कुंडेश्वर बशिष्ठेश्वर धूमेश्वर आदि प्रमुख हैं। ऋषि-मुनियों की तपस्थली के रूप में गंगा यमुना के दोआब क्षेत्र का इष्टापथ कितने ही सिद्ध ऐतिहासिक तथ्य छिपाए हुए है। इन सभी को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से इष्टिकापुरी अकादमी की स्थापना साहित्यकार देवेश शास्त्री द्वारा जनवरी २००५ में हुई जिसका रजिस्ट्रेशन भी तत्काल कराया गया। इष्टिकापुरी अकादमी ने २००५ में हिन्दी पत्रकारिता के भीष्म पितामह माने जाने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पूर्व चेयरमेन पं देवीदयाल दुबे की प्रथम पुण्य तिथि पर ९-२-२००५ को केके कॉलेज में सेमीनार आयोजित किया। श्री दुबे की स्मृति में कलम के जादूगर थ्री डी नामक पुस्तक के प्रकाशन का निर्णय किया किंतु अपरिहार्य कारणों से पुस्तक नही छप पाई। इष्टिकापुरी अकादमी ने कंप्युटर शिक्षा के क्षेत्र में अंकिता कंप्यूटर सेंटर स्थापित किया जो विना मुनाफा साहित्यिक पुस्तकों के प्रकाशन का प्रमुख संस्थान है जिसकी देख रेख इष्टिकापुरी अकादमी के अध्यक्ष श्री राजेश मिश्रा महामंत्री देवेश शास्त्री कोषाध्यक्ष श्रीमती प्रतिभा स्वयं देख रहे हैं। इष्टिकापुरी अकादमी ने इटावा जनपद के सामाजिक ऐतिहासिक भौगोलिक साहित्यिक सांस्कृतिक राजनैतिक पक्ष को भावी पीढी तक पहुचने के उद्देश्य से इटावा जानो सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता आयोजित की जिसकी तैयारी के लिए इष्टिकापुरी दिग्दर्शिका नामक पुस्तिका प्रकाशित की और उसका विभिन्न विद्यालयों में निःशुल्क वितरित कराई। जिला व विद्यालय स्तर पर प्रथम द्वितीय तृतीय स्थान पाने वाले प्रतिभागी पुरस्कृत किए गए यह प्रतियोगिता इष्टिकापुरी अकादमी के स्तर से लगातार ४ वर्ष चली अब जनपद प्रदर्शनी एवं पशुमेला द्वारा आयोजित क्विज कंटेस्ट प्रतियोगिता इटावा जानो-भारत जानो प्रतियोगिता के रूप में हो रही है।
साहित्यिक क्षेत्र में इष्टिकापुरी अकादमी ने ४ वर्षों में कई ऐतिहासिक कार्य किए। काव्य गोष्ठियां कविसम्मेलन सम सामयिक विषयों पर सेमीनार के साथ पत्रकार देवीदयाल दुबे शिक्षाविद बालाभ्यासी शर्मा कवि गिरिजा शंकर मिश्रा गिरिजेश बाबुराम दुबे प्रेम मूर्धन्य कवि शिव शरण अवस्थी पंगु चम्बल घाटी खंड काव्य के रचयिता शिवरतन सिंह प्रख्यात उपन्यासकार कुमार कश्यप जनवादी कवि अशोक अम्बर की स्मृति में कलम कारों को सम्मानित किया। यह क्रम जारी है। इष्टिकापुरी अकादमी ने मूर्धन्य कवि शिव शरण अवस्थी पंगु के जन्म स्थान ग्राम खिरिया जनपद मैनपुरी में जून 2008 में ऐतिहासिक खिरिया महोत्सव के आयोजन की प्रक्रिया प्रारम्भ की प्रथम महोत्सव में रामकथा कृष्णकथा पर व्याख्यान उत्तर भारत के प्रख्यात कलाकारों द्वारा धनुष भंग व परशुराम-लक्ष्मण संवाद का मंचन तथा विराट कवि सम्मलेन संपन्न हुआ।

इष्टिकापुरी अकादमी ने अनाचार अत्याचार भ्रष्टाचार के विरुद्ध जंग का ऐलान कर दिया है जिसकी कमान सेवानिवृत्त अधिकारी कर्मचारी शिक्षक संभल रहे हैं। इसके लिए देखें- jangeimaan.blogspot.com